कवि-चित्रकार
अपने दूसरे कविता-संग्रह को लेकर मन ऊहापोह में था कि क्या मुझे लोग और पढ़ना चाहेंगे? मेरी छोटी-छोटी भावनाओं की कश्तियाँ किसी को पार पहुँचा पाएँगी? शायद हाँ, शायद ना। लेकिन यह एक यात्रा है
जिसका अर्थ कहीं पहुँचना नहीं केवल चलना है।
यह यात्रा, जो प्रारंभ हुई सात वर्ष की छोटी उम्र में और सतत् गतिशील है आज इकसठवें सोपान तक। जीवन की ख़ूबसूरती इसके संघर्ष में है, स.फर में है।
