जन्म स्थान : मालपुरा (राजस्थान)
शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी. (संगीत)
सम्प्रति : सहायक आचार्य, संगीत विभाग, राज. विश्वविद्यालय, जयपुर (राजस्थान)
उनका मानना है कि कलाएँ मनुष्य के चेतन-अचेतन मन की अभिव्यक्ति हैं। संगीत अन्य कलाओं की अपेक्षा भावनाओं का बेहतर प्रकटीकरण करता है। लोकसंगीत मन का अनूठा प्राणायाम है, जो मन को जाग्रत करता है और मानव मन के आदिम पक्ष से सीधे जुड़कर जीवन का गतिमान सांस्कृतिक पक्ष प्रस्तुत करता है।
