Reena Menariya

Reena Menariya

डॉ. रीना मेनारिया रो जलम 16 फरवरी 1982 नै मेनार गांव में हुयो। हिन्दी अर राजस्थानी दोनूं भासावां में लगोलग लेखन रै साथै, डॉ. मेनारिया ‘मीरा के काव्य का सामाजिक और सांस्कृतिक अध्ययन’ विसै पै पी.एचडी. कर्योड़ी हैं।

छप्योड़ी पोथियां हिन्दी में ‘लगाव का रिश्ता और अन्य कहानियां’, ‘उधार के कौर और अन्य स्त्री विमर्श कहानियां’ अर ‘बनास पार’।

राजस्थानी में ‘घी रो दीवलो’, ‘तकदीर रा आंक’, उपन्यास ‘पोतीवाड़’, ‘नटणी री नौपत’ अर डोगरी कहाणी संग्रै ‘बदनामी री छिंया’ रो राजस्थानी उल्थो (केंद्रीय साहित्य अकादमी, दिल्ली)।

आपनै राजस्थान साहित्य अकादमी सूं ‘बनास पार’ पोथी पै ‘रांघेय राघव पुरस्कार’ अर राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी सूं ‘घी रो दीवलो’ पोथी पै ‘प्रेमजी प्रेम युवा लेखन’ पुरस्कार मिल्योड़ा। केई बरसां सूं आपरी रचनावां रेडियो अर दूरदर्शन पै लगोलग प्रसारित व्हैती रैवै।