जन्म : 01 जुलाई 1984
संप्रति : स्कूल व्याख्याता
रिड़मल दान चारण ‘राज’ समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य के संवेदनशील एवं सशक्त रचनाकार हैं। राजस्थान के बाड़मेर जिले की मरुभूमि से जुड़ी उनकी रचनाएँ लोकजीवन, अभाव, प्रेम, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से अभिव्यक्त करती हैं। उनकी कहानियों में रेगिस्तान की संस्कृति, लोक-स्मृतियाँ तथा आधुनिक जीवन के द्वंद्व का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।
