जन्म 7 फरवरी 1980, जयपुर। जेएनयू, नई दिल्ली से कला सौंदर्यशास्त्र एवं राजस्थान विश्वविद्यालय से ड्रॉइंग-पेंटिंग में एम.ए., राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान से भी कला इतिहास का अध्ययन। वर्तमान में स्वतंत्र चित्रकार और कला लेखक के रूप में देश भर के कला संस्थानों व विश्वविद्यालयों से सक्रिय रूप से जुड़े हैं।
अमित ने 14 एकल और 150 से अधिक सामूहिक कला-प्रदर्शनियों में भाग लिया। दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया, नॉर्वे, लातविया, तुर्की, ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, इटली, चीन, श्रीलंका, नेपाल, दुबई और शारजाह जैसे देशों में यात्रा प्रदर्शनियाँ कीं।
उनकी पहली कविता-पुस्तक ‘होने न होने से परे’ को भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘शब्द-शब्द विसर्जन’ और ‘शब्द कहे से अधिक’ काव्य-संग्रहों ने समकालीन कविता में विशिष्ट पहचान बनाई।
अमित को सत्य-शांति, मरुपरंपरा, सृजन सम्मान, वाणी समागम, प्रकृति सम्मान, चित्रकार रामकुमार स्मृति, कलाश्री, कलारंग, कला संवाहक और विश्व प्रसिद्ध मार्क रॉथको आर्ट रेज़िडेंसी अवॉर्ड एवं ‘ताउ हुआ तान’ अंतरराष्ट्रीय आर्ट रेज़िडेंसी जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।
बचपन से ही योग, आध्यात्म, दर्शन और तंत्र के प्रति रुचि। हिमालयवासी योगियों के साथ गहन अनुभव और वेदांत दर्शन से निरंतर प्रेरणा।
सम्प्रति : स्वतंत्र चित्रकार, जयपुर
