Shashi Trishna

Shashi Trishna

उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में 1 जुलाई 1969 को जन्मी शशि ‘तृष्णा’ का जीवन विज्ञान, समाज और सृजन के समन्वय का एक सुंदर उदाहरण है। विज्ञान में स्नातक उपाधि प्राप्त कर, बी.एड. और एम.एड. की डिग्री से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ देने के लिए प्रतिबद्ध शशि वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के एक विद्यालय में विज्ञान शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। जहाँ वे न केवल ज्ञान बाँटती हैं, बल्कि संवेदना और समझ की दीपशिखा भी जलाए रखती हैं।
शिक्षा के साथ-साथ उनका मन सामाजिक सरोकारों, प्रकृति के सौंदर्य, लेखन, संगीत तथा आर्ट और क्राफ्ट में सहज रूप से रमता रहा है। यही बहुआयामी रुचियाँ उनके रचनात्मक संसार को समृद्ध करती हैं। वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और ऑनलाइन माध्यमों पर प्रकाशित होती रही हैं। उनके शब्दों की दुनिया में कहानियाँ हैं, कविताएँ हैं, यात्राएँ हैं और अनुभवों की आत्मीय व्याख्या भी।
यह उनकी प्रथम पुस्तक है— एक ऐसा क्षण, जहाँ आत्मा की बातों को पहली बार स्याही का साथ मिला है।
उनके लेखन में कोई बनावट नहीं— बस एक सरल, सच्चा और संवेदनशील मन बोलता है। हर शब्द में जीवन की कोई अनुभूति, गाँव की माटी की ख़ुशबू और मन के कोमल भावों की अभिव्यक्ति सहज रूप से झलकती है।