Surendra Chaturvedi

Surendra Chaturvedi

सुरेन्द्र चतुर्वेदी की प्रकाशित कृतियाँ :
कविता— शवयात्रा स्वीकृतियों की, कैक्टस के फूल, मैं से तुम तक।

वेदमंत्रों का काव्यानुवाद— कभी नहीं सूखता सागर।

उपन्यास— सलीब पर टंगा सूरज।

मनोवैज्ञानिक विश्लेषण— पुलिस और मानव व्यवहार।

ग़ज़ल— दर्द-बे-अंदाज़, वक़्त के ख़िलाफ़, अंदाजे बयां और, आसमाँ मेरा भी था, अंजाम ख़ुदा जाने, कोई अहसास बच्चे की तरह, कोई कच्चा मकान हूँ जैसे, ये समंदर सूफ़ियाना है, काग़ज़ की ज़मीन पर (उर्दू में ग़ज़ल), सब्र का स.फर, परिन्दे पढ़ रहे हैं, बोलती है रूह भी, इस बार इतना ही, कुछ इसलिए भी, मेरे अंदर कई समंदर, हर कोई बेगाना सूफी, मंजर और भी हैं, समंदर सो रहा है, मै.कदा होने को हूँ, वीराना ज़िन्दा होता है, अंधी गली है बंद मकान, मैं जो तेरी ज़ुबान हो जाता, खा बैठा था ठोकर मैं, मैं सबके दुख तोल रहा था, लोहा ख़ुद को काट रहा था, सिकंदर याद करता है, कहाँ ज़रूरी था, आसमान तो देना होगा, मुमकिन कैसे लगा तुम्हें ये, मैं ग़ालिब की ग़ज़लों जैसा, सिर्फ़ पँछी बयान देते थे, हमने आँखें निकाल कर रख दीं, कभी कलंदर होके रहेगा, ज़ख़्मों को ज़िन्दा रखना है, याद रखे बस ढाई आखर, दर्जा मिला दरख़्तों का, हाल फ़िलहाल, ख़ुशबू का कुछ तो पता चले, सिकंदर फिर कहीं मारा गया है, ख़ुद को जगा रहा हूँ मैं, मरने का डर मार रहा है, बिछड़ गई तनहाई मेरी, इश्क़ नहीं है जंग अगर, दीवाना हूँ जग ज़ाहिर है, आसमान से आगे है वो, नेज़े पर सर मेरा है, नहीं थे दर पे दरवाज़े हमारे, रात में जंगल हो जाता हूँ, आग मुतासिर थी पानी से, मुझमें से जब साया निकला, बिछड़े तो मर जाना था न, ख़ुद को कहाँ मय्यसर हूँ मैं, प्यास में पानी डूबा आज, चश्मा बदल गया है मेरा।