Kumar Krishan Sharma

Kumar Krishan Sharma

हिन्दी कवि-लेखक व अनुवादक कुमार कृष्ण शर्मा की लेखनी सीमांत जीवन, विस्थापन, प्रेम, स्मृति, प्रतिरोध और लोकसंस्कृति के बहुआयामी अनुभवों से निर्मित हुई है। जम्मू के निकट पुरखू गाँव में 13 अगस्त 1976 को जन्मे कुमार कृष्ण ने बी.एस. सी. (ऑनर्स) एग्रीकल्चर तथा एम.ए. (अंग्रेज़ी) की शिक्षा प्राप्त की।

इनका एक कविता-संग्रह ‘लहू में लोहा’ प्रकाशित हो चुका है। हिन्दी प्रेम-कविताओं के अंग्रेज़ी अनुवाद-संग्रह Dervish in the City of Merchants के माध्यम से इन्होंने भारतीय भाषाओं और लोकपरम्पराओं को व्यापक पाठक-वर्ग तक पहुँचाने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। वर्ष 2013 में इन्होंने जम्मू-कश्मीर का पहला हिन्दी साहित्यिक ब्लॉग ‘खुलते किवाड़’ आरम्भ किया।

हिन्दी और अंग्रेज़ी पत्रकारिता में एक दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहे कुमार कृष्ण शर्मा का रचनात्मक संसार हिंसा, युद्ध, सीमा, विस्थापन, स्मृति और मनुष्य के बीच फैले उन अदृश्य पुलों की खोज करता है जिन्हें इतिहास और राजनीति अक्सर अनदेखा कर देते हैं। इनकी लेखकीय दृष्टि मानवीय यथार्थ को गहरी संवेदना और आलोचनात्मक विवेक के साथ अभिव्यक्त करती है।