Paramita Sarangi

Paramita Sarangi

पारमिता षड़ंगी ओड़िआ साहित्य जगत में सुपरिचित नाम हैं। वे अपनी आँचलिकता में सशक्त स्त्री-कथाकार एवं कवयित्री ही नहीं, कुशल ओड़िआ भाषानुवादक भी हैं। नारी मनस्तत्व का विश्लेषण, सूक्ष्म अवबोध का अन्वेषण तथा एक बलिष्ठ कहानी का आधार उनकी कहानियों को अलग पहचान देता है। जीवनवादी कहानीकार होते हुए भी पारमिता की कविताएँ चेतना और मानसिकता को गहराई से प्रभावित करती हैं। हिन्दी और ओड़िआ में कहानी तथा कविता लेखन के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। अब तक उनके छह कहानी-संग्रह, तीन कविता-संग्रह और ग्यारह अनुवाद-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

पारमिता की रचनाएँ वागर्थ, आजकल, समकालीन भारतीय साहित्य, भाषा, नूतन कहानियाँ, देशज, देशधारा, विश्वगाथा, कृति बहुमत, अंतरंग आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों और विदेशों में भी उनकी रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं का बांग्ला, राजस्थानी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, तमिल, मैथिली, ओड़िआ और अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद हुआ है।
पारमिता को उनके कहानी-संग्रह ‘संबित के पास जब मैं नहीं थी’ के लिए महाराष्ट्र हिन्दी साहित्य अकादमी की ओर से पुरस्कृत किया गया है।