जन्म तिथि : 13 फरवरी 1947
जन्म स्थान : ग्राम ललाणा, तहसील पावटा, जिला कोटपूतली-बहरोड़।
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य)
मूलतः कवि। कहानी, उपन्यास के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाओं में अलोचनात्मक लेखन भी। राजस्थानी में भी कविता कहानी। पहली राजस्थानी कहानी ‘कूँपळ’ हिन्दी, तेलुगू तथा डोगरी में अनूदित।
प्रकाशित कृतियाँ : कविता संग्रह– घर के भीतर पर (1987), पुराना डाकघर और अन्य कविताएँ (1991), दीर्घायु हैं मृतक (1996), उत्तर राग (2001) घरों से घिरी दुनिया में (2007), मुश्किल दिनों में अच्छी कविताएँ (2007), कितना कम जानते हैं ख्यातिहीनता के बारे में (2007), निज कवि धातु बचाई मैंने (2017), एक हिस्सा हर्फ़ (ग़ज़ल संग्रह 2017), कवि-निकष (गद्य-संकलन, 2018)। विजयिनी मानवता हो जाय (रूस यात्रा के दौरान सहयात्री लेखकों के लेखों का सम्पादन, 2018), एक शब्द ऋषि के देश में (रूस-यात्रा के संस्मरण, 2021), गद्य की ज़मीन (गद्य संकलन, 2022)। इन दिनों-राजस्थानी कहानियों के संकलन और उपन्यास पर काम।
सम्पादन : अनियतकालिक साहित्यिक पत्र ‘बखत’ का कथाकार मित्र सत्यनारायण के साथ सम्पादन। राजस्थान सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा प्रकाशित मासिक ‘राजस्थान विकास’ का दो वर्षों तक सम्पादन।
रचना सहयोग : राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति, जयपुर की नव साक्षरों के लिए प्रकाशित पुस्तक ‘राम-राम सा’ एवं नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा नव साक्षरों के लिए प्रकाशित कथा-कृति के लिए।
भागीदारी : अज्ञेय जी द्वारा माउन्ट आबू में आयोजित वत्सल-निधि शिविर एवं विभिन्न साहित्यिक संगोष्ठियों में हिस्सेदारी।
प्रसारण : दूरदर्शन और आकाशवाणी से रचनाओं का प्रसारण।
पुरस्कार : राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा प्रथम कविता संग्रह ‘घर के भीतर घर’ के लिए ‘सुमनेश जोशी पुरस्कार। पुराना डाकघर एवं अन्य कविताएँ के लिए : ‘सुधीन्द्र’ पुरस्कार । ‘निज कवि धातु बचाई’ मैंने के लिए राजस्थान साहित्य अकादमी का सर्वोच्च ‘मीरा पुरस्कार’। जोधपुर की ‘कथा’ पत्रिका का कविता से सम्बद्ध पहला ‘नन्द चतुर्वेदी सम्मान’। अभी हाल में कविता के लिए अखिल भारतीय ‘शमशेर सम्मान’।
पन्द्रह वर्षों तक शिक्षक फिर राजस्व सेवा में चयन होने पर तहसीलदार पद पर सेवारत रहते हुए सन् 2003 में सेवानिवृत्त।
सम्प्रति : स्वतन्त्र लेखन एवं पठन-पाठन।
