कहाँ नहीं है काई | कविता
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दरवेशाना रंग के कवि राजकुमार कुम्भज को अज्ञेय द्वारा संपादित चौथे तारसप्तक के कवि के तौर पर जाना जाता है, हालाँकि उन का नाम केवल इसी पहचान का मोहताज नहीं है। उन की कविताएँ अपने आप में उन की पहचान के लिए का.फी हैं। कुम्भज की कविताएँ बेबाकी से बनी कविताएँ हैं, जो इतनी बेबाक हैं कि पाठक अपने अंतर्मन में झाँक कर देखने को आतुर हो जाता है कि उस की आत्मा का नंग कैसा है?
Author : Rajkumar Kumbhaj
ISBN : 978-93-48290-27-4
Language : Hindi
Binding : Paperback
Pages : 124
Year : 2025
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