उसी रहगुज़र पर शायद | उपन्यास
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रिश्तों की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं कि हमें चोट मिलती है, बल्कि यह कि कभी-कभी अनजाने में हम वही चोट आगे बढ़ा देते हैं। जहाँ समझ शुरू होती है, हिंसा चाहे हथियारों से हो या शाब्दिक, वहीं समाप्त हो जाती है। लेकिन यदि समझ न आये तो वही दर्द दूसरों को हस्तांतरित कर देते हैं, किसी और के हिस्से की मामी बन कर, किसी और के आत्मसम्मान को चोट पहुँचा कर। इन शब्दों में एक स्त्री की नहीं, हर उस इंसान की कहानी है जिसने सहा भी है दोहराया भी। — आशा पाराशर
Author : Asha Parashar
ISBN : 978-93-48290-32-8
Language : Hindi
Edition : First
Binding : Paperback
Pages : 172
Year : 2026
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