जब एक ही घर में रहना है | कविता
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इस संग्रह में शामिल शैलेंद्र शांत की कविताएँ बहुत लंबी न होते हुए भी अपने आप में अनुभव का विस्तृत दस्तावेज़ हैं। कवि की सामाजिक चेतना और उस के भीतर के मध्य-वर्गीय मनुष्य के बीच के अंतद्र्वंद्व को गहराई से जानने के लिए इस संग्रह की कविताओं पर निगाह करना ज़रूरी सा है। इसी मानवीय ऊहापोह में किस प्रकार कविता बनती है, इस संग्रह में देखा जा सकता है।
Author : Shailendra Shant
ISBN : 978-81-975844-1-1
Language : Hindi
Binding : Paperback
Pages : 100
Year : 2024
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