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कविता : मन की आवाज

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कविता मन की वह आवाज है, जो अक्सर शब्दों के शोर में दब जाती है। मनुष्य अपने जीवन में न जाने कितनी बातें कह नहीं पाता। कुछ बातें परिस्थितियाँ रोक देती हैं, कुछ रिश्तों की मर्यादा, कुछ समाज का भय और कुछ अपने भीतर की झिझक। ऐसे में कविता उसके भीतर जमा उन भावों को रास्ता देती है, जिन्हें वह किसी के सामने बोल नहीं पाता। कागज उसके लिए एक ऐसा स्थान बन जाता है, जहाँ वह बिना किसी संकोच के अपने मन को रख सकता है।

कविता लिखते समय कवि बाहर की दुनिया से धीरे-धीरे दूर होकर अपने भीतर उतरता है। वहाँ उसे अपनी ही स्मृतियाँ, इच्छाएँ, दुख, प्रसन्नताएँ, प्रेम, अकेलापन और अनगिनत अनकहे प्रश्न मिलते हैं। किसी पुराने पेड़ को देखकर बचपन याद आ सकता है, बारिश की आवाज किसी भूली हुई घटना को लौटा सकती है और किसी राह से गुजरते हुए अचानक कोई चेहरा स्मृति में उभर सकता है। यही छोटे-छोटे अनुभव भीतर भाव पैदा करते हैं और जब वे शब्दों का रूप लेते हैं तो कविता जन्म लेती है।

कविता की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि वह मन की बात कहकर भी सिर्फ कवि की नहीं रह जाती। कवि अपने अनुभव को शब्द देता है, पर उन शब्दों में पाठक अपने जीवन की कोई स्मृति खोज लेता है। किसी कविता में लिखा हुआ अकेलापन पढ़कर किसी को अपना अकेलापन याद आता है, किसी पंक्ति में माँ दिखाई देती है, किसी बिंब में गाँव का रास्ता और किसी शब्द में अपना खोया हुआ प्रेम। इस तरह कविता एक मन से निकलकर अनेक मनों तक पहुँचती है।

मन की आवाज हमेशा ऊँची नहीं होती। वह कई बार बहुत धीमे बोलती है। कविता उसी धीमी आवाज को सुनने की कला है। आज की तेज दुनिया में जहाँ हर व्यक्ति लगातार किसी न किसी काम, सूचना और शोर से घिरा हुआ है, कविता हमें कुछ क्षण ठहरना सिखाती है। वह पूछती है कि हम वास्तव में क्या महसूस कर रहे हैं, किस बात ने हमें भीतर से छुआ है और हमारे जीवन में कौन-सी चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम रोज देखते तो हैं, पर समझने के लिए कभी रुकते नहीं।

इसलिए कविता सिर्फ शब्दों की सुंदर व्यवस्था नहीं है। वह मनुष्य और उसके भीतर के संसार के बीच बना एक पुल है। जब मन में कोई ऐसी बात जन्म लेती है जिसे सामान्य भाषा में कहना कठिन हो, तब कविता उसका सहारा बनती है। वह आँसू को अर्थ देती है, खुशी को स्मृति देती है और मौन को आवाज देती है। शायद इसी कारण सच्ची कविता पढ़ते हुए हमें कई बार लगता है कि कवि ने वही लिखा है, जो हम लंबे समय से महसूस कर रहे थे पर कह नहीं पाए।

कविता सचमुच मन की आवाज है—एक ऐसी आवाज, जिसे सुनने के लिए बाहर का शोर कम और भीतर की खामोशी अधिक जरूरी है।

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