दीये की बाती बन जाओ | कविता
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‘दीये की बाती बन जाओ’ नारी के अंतर्मन की सशक्त आवाज़ है, जो समाज के तमस को सत्य के दीप से आलोकित करती है। इन कविताओं में नारी का आत्मबोध, प्रकृति से एकाकार होने की ललक, और सामाजिक कुरीतियों के ख़िलाफ़ आक्रोश जीवंत हो उठता है। शिवांगी की कलम कभी माँ, बहन, बेटी के प्रेम और समर्पण को रंग देती है, तो कभी घरेलू हिंसा और पराधीनता के बंधनों को तोड़ने का आह्वान करती है।
Author : Shivangi Singh Sikarwar
ISBN : 978-93-48290-36-6
Language : Hindi
Edition : First
Binding : Paperback
Pages : 100
Year : 2025
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