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मनुष्य के जीवन में मित्रता का अपना एक विशेष स्थान है। एक अच्छा मित्र हमारे सुख में प्रसन्न होता है, दुख में साथ खड़ा रहता है और कठिन समय में हमें सही दिशा दिखाता है। जीवन में ऐसे मित्र मिलना हमेशा आसान नहीं होता। कई बार परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, लोग दूर हो जाते हैं और हमारे आसपास की भीड़ के बीच भी मन अकेला रह जाता है। ऐसे समय में पुस्तक एक ऐसे साथी की तरह हमारे साथ रहती है, जो बिना किसी अपेक्षा के हमें अपना समय, ज्ञान और अनुभव देती रहती है।
पुस्तक से मित्रता की सबसे सुंदर बात यह है कि वह हमारे समय और परिस्थिति के अनुसार हमारे साथ रहती है। जब मन प्रसन्न होता है, तब पुस्तक हमारी प्रसन्नता को नए विचारों से समृद्ध कर सकती है। जब मन उदास होता है, तब उसके शब्द हमें भीतर से संभाल सकते हैं। जब किसी प्रश्न का उत्तर नहीं मिलता, तब किसी पुस्तक का एक विचार हमारी सोच को नई दिशा दे सकता है। पुस्तक हमारे सामने संसार का वह रूप खोलती है, जिसे हम अपने छोटे से जीवन में प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते।
एक पुस्तक में किसी लेखक का वर्षों का अनुभव, चिंतन और संवेदना संचित हो सकती है। हम किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन को पढ़ते हुए उसके संघर्षों को समझते हैं, उसकी सफलताओं से सीखते हैं और उसकी गलतियों से सावधान होते हैं। इतिहास की पुस्तक हमें बीते समय से मिलाती है, साहित्य मनुष्य के भीतर की दुनिया से परिचित कराता है, विज्ञान हमारी जिज्ञासा को विस्तार देता है और दर्शन जीवन को देखने की नई दृष्टि देता है। इस तरह पुस्तक हमारे कमरे में रहते हुए भी हमें अनेक संसारों की यात्रा करा देती है।
पुस्तक की मित्रता में कोई दिखावा नहीं होता। वह हमारे पास बैठकर अपने होने का शोर नहीं करती। जब हम उसे खोलते हैं, तभी उसका संसार हमारे सामने खुलता है। वह हमें सुनने के लिए बाध्य नहीं करती, हमारे विचारों पर अपना अधिकार नहीं जमाती और हमारी कमियों पर हँसती नहीं। हम उसे जितना समय देते हैं, वह उतनी ही गहराई से हमारे भीतर उतरती जाती है। कई पुस्तकें ऐसी होती हैं जिन्हें हम एक बार पढ़ते हैं, फिर वर्षों बाद दोबारा पढ़ने पर उनमें कुछ नया दिखाई देता है। इसका कारण यह है कि पुस्तक वही रहती है, पर उसे पढ़ने वाला मन बदल चुका होता है।
आज के समय में हमारे पास संवाद के अनेक साधन हैं। कुछ क्षणों में हम दुनिया के किसी भी कोने की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, फिर भी गहराई से सोचने और स्वयं से संवाद करने के लिए पुस्तक का महत्व कम नहीं हुआ है। तेज़ी से बदलती दुनिया में पुस्तक हमें कुछ देर ठहरना सिखाती है। वह हमें पढ़ने के साथ-साथ सोचने, समझने और प्रश्न करने की आदत देती है।
पुस्तक एक सच्चा साथी इसलिए भी है क्योंकि वह हमारे भीतर के संसार को समृद्ध करती है। वह हमें अकेलेपन से बचाने के साथ-साथ अपने भीतर उतरने का अवसर भी देती है। उसके पन्नों में हमें कभी अपना कोई प्रश्न मिलता है, कभी किसी अनजान व्यक्ति की कहानी में अपनी ही पीड़ा दिखाई देती है और कभी किसी विचार में भविष्य की राह दिखाई देती है।
शायद इसी कारण पुस्तक को केवल पढ़ने की वस्तु समझना उसके महत्व को छोटा कर देना है। पुस्तक हमारे हाथ में आने वाली एक ऐसी दुनिया है, जो हमारे जाने के बाद भी हमारे भीतर बनी रह सकती है। एक सच्चे मित्र की तरह वह हमारे जीवन में आती है, हमारे विचारों को बदलती है और कई बार हमें उस व्यक्ति के करीब ले जाती है, जिसे हम स्वयं बनना चाहते हैं।
पुस्तक पढ़ना ज्ञान प्राप्त करना भर नहीं है; यह स्वयं से और संसार से एक गहरी मित्रता की शुरुआत है।



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